और कभी लगता है खो जाऊ कभी गर तुम भरोसा न करो मुझ पर
हा अब तो सबूत ले के चलता जिंदा होने का क्या पता तुम्हे इस पर भी यकीन हो न हो
जीता हूँ बस तेरे भरोसे तुझे यकीन हो न हो
नफरत होती जब कोई कहता है तुम झूठ बोलते हो
पर यकीन कैसे दिलाऊ की मैं झूठ नहीं बोलता

No comments:
Post a Comment