Monday, 11 November 2013

"अभी तक बाकि है"














छु गया था आप से, अहसास अभी तक बाकि है !
बरसात तो चली गयी पर बहार अभी तक बाकि हैं !!

कहने को तो ये सारा जंहाँ, पूरी तरह से मेरा ही है !
जहाँ वालो को मेरा अपना होना अभी तक बाकि है!!

पुत्र ने आज मर्यादा को जला कर रख कर दिया !
पिता कि चिता में,लगी आग अभी तक बाकि है !!

मेरा भगवान मेरे साथ है,हर राह,हर मुकाम में !
इसी रहना साथ मेरे,मंजिल,अभी तक बाकि है !!

वैसे तो मैंने पी तो ली है,मैखाने,मैखाने में जाकर !
बस उनकी नजरो से पीना , अभी तक बाकि है !!

कई गिरे बने हैं , मोहब्बत में कई दफा मेरे मौला !
मेरा इस सर जमी से मोहब्बत, अभी तक बाकि है !!

शीशा,पत्थर के रिश्तो कि तरह है तेरा मेरा रिश्ता !
ज़माने भर से रजामंदी ,लेना अभी तक बाकि है !!

Monday, 28 October 2013

दोस्ती के नाम कर दिया




















चले कदम दो कदम , और अपना, नाम कर दिया ! 
संग थे तुम्हारे सुख,दुःख में तुम्हारा साथ है दिया !!

मैं मुसाफिर हूँ, घर से चला अकेला था,अकेला हूँ !!
अपनी राह को जब से मैंने मंजिल के नाम कर दिया !!

टूटे हुए दिल, और झुकी नजर से अंदाजा न लगाना !!
मैं ने तो आज कठोर , पत्थर दिल को मोम कर दिया !!


आज कल हर शख्स मुझे घूरती निगाहो से देखता है !!
जब से मैं ने तुझे मोहब्बत, का, मतलब समझा दिया !!

मेरे हौसलो को मापने कि कोशिश मत करना यारो !!
मैं ने तो आज पैमाने को तोड़ कर खाक कर दिया !!

मेरी बुलंदी तो बस मेरे साथ चलती है ,हर दिन,रात !!
जब से मैं ने अपनी मेहनत को उसके नाम कर दिया !!

बार , बार मुझे गिराने कि कोशिशे नाकाम हो गयी हैं !!
जब मैंने अपने दुश्मनो को दोस्ती के नाम कर, दिया !!

Tuesday, 22 October 2013

मेरे दर्द का करण कोई पूछने नहीं आते



लाख लाख शुक्र है जो सपने में मेरे नहीं आते ! 
कहते हैं, हकीकत में कभी पैगाम नहीं आते !!

मैं तो अक्सर ही तुझे मेरा ख्याल में ही पाता हूँ !
भला हुआ जो तुम मुझे से मिलने नहीं आते !!

गीत गुनगुना कर भूल जाता हूँ गिले शिकवे !
सुनना मत मुझे,गीतों के राग भी नहीं आते !!

खुद से लड़ा कई दफा और हर बार हार जाता हूँ !
यार कहते हैं किसी बैध से मिल क्यूँ नहीं आते !!

कैसे कहू दोस्तों अक्सर क्यूँ खुद से लड़ रहा हूँ !
फूल उदास हैं,इनसे भवरे मिलने क्यूँ नहीं आते !!

दुसरो के दर्द में मैं भी खुद आंसू क्यूँ बहा रहा हूँ !
पर क्या मेरे दर्द का करण कोई पूछने नहीं आते !!

Sunday, 22 September 2013

फिर आज धड़का है दिल बड़ी जोर से !











फिर आज धड़का है दिल बड़ी जोर से ! 
कंही कोई मुझे याद कर रोया होगा !!

खुदा उस पर बस इतना करम करना !
नींद दे देना वो सारी रात न सोया होगा !!

बात क्या हुई होगी जो मैं उसे याद हूँ !!
उसे हवाओं ने मेरा हाल सुनाया होगा !!

आज अमावस की रात भी उजाली है !!
उसने याद कर मुझे दीप जलाया होगा !!

आज तो फूलो के रंग भी उड़ गए हैं !
वो रोकर फिर से न मुस्कुराया होगा !!

लाखो की मोतियों के दाम गिर गए हैं !
तोड़ कर हार जमीन में फैलाया होगा !!!

आज हवाओ में कुछ नमी नमी सी है !!
खुदा यार ने आज आंसू बहाया होगा !!

Friday, 23 August 2013

क्या मुसीबत है दिल



















क्या मुसीबत है दिल से गजल भी नहीं लिख सकता !

डरता हूँ कंही नाम न आ जाये मेरी गजल में ,
बदनामी से बड़ा डर लगा है , तेरी बदनामी सह नहीं सकता !!

और बदनामी मेरी हो बस ऐसा हो नहीं सकता !!
करे न दुनिया तुझ पर सितम ऐसा हो नहीं सकता !
मिलु न तुम से यैसा सोच साँस रुक जाती है !
तेरे बिना लगता है अब मैं जी नहीं सकता !!

कहते हैं लोग बड़ा दर्द है तेरी लेखनी में,भूल उसे !
मैं कहता लिखे बिना तुझे मैं रह नहीं सकता !!
बस आज ख़त्म हो इन यादो का सिलसिला
और मैं हूँ की सांसो के बिना रह नहीं सकता !!

Sunday, 11 August 2013

अंतिम शब्द तेरी बेगुनाही के
















लिखूंगा अंतिम शब्द तेरी बेगुनाही के !

सरहद में अंतिम साँस लेते सिपाही के !!

की क़त्ल नहीं किया मेरे जज्बातों का ,
मेरे सारे मिटे अंतिम बचे ख्यालातो का !!

दर्द को गले लगाकर मौत के इन्तजार में,
उमड़ते घुमड़ते, आते जाते विचार में !!

खून से लथपथ सोच रहा था !
मेरा घर कच्चा ही रह गया था !
जिसे तालाब डूबता बचाकर बनाया था संगिनी !
किया वादा अधुरा ही रह गया था !!

जब निकला घर से देश के लिए माँ ने जो कहा :

जा बेटा कुर्वान हो जाना धरा के लिए !
इस प्यारी सी धरती भारत माँ के लिए !

लिखूंगा अंतिम शब्द तेरी बेगुनाही के !
सरहद में अंतिम साँस लेते सिपाही के !!

मेरा चार साल का बेटा आता था सामने !
धरती में पैर पटक देता था सलामी !
करे शैतानी खुद को लगता था डाटने !!
एक साल की मेरी प्यारी बेटी सुनामी !

मेरी बहन के आँखों के सपने !
शादी कर बस जाये घर अपने !

जब लेने गया मुनीम से कर्जा था !
गरीब है तू दिया भिखारी का दर्ज था !

लिखूंगा अंतिम शब्द तेरी बेगुनाही के ,
सरहद में अंतिम साँस लेते सिपाही के !!
आज योगेश अंत न लिखूंगा सिपाही के !
पर लिखूंगा अंतिम शब्द तेरी बेगुनाही के !!

Friday, 5 July 2013

मेरा पेड़ और देश

@@मेरा पेड़ और देश@@

 
आज ५ साल बाद,
अपने लगाये आम के पेड़ से गया मिलने ! 
ख़ुशी से इतर कर पेड़ लगा हिलने !

बोला मेरे पानी, खाद, दाता आ गए !
बर्षो के बाद मुझे से मिलने आ गए !

लगाये पेड़ को देख हुआ अचंभित !
यही मेरा पेड़ है, मैं हुआ भ्रमित !!

क्यूंकि मेरा पेड़ उतना ही था बड़ा जितना ५ साल पहले !
मुझे न गया रहा,देख उसकी हालत गया न सहा ,

पेड़ के कहा:
क्या करू जितना होता हु बड़ा,
हर दिन गुमान से भरा,

और एक दिन पूर्णमासी आती है !
अप की माँ मुझे तोड़ ले जाती है !!

उस आम के पेड़ को देख देश का ख्याल आया !
देश भी पेड़ की तरह कितना गया है सताया !!

हर पंचवर्षी में कोई न कोई आता है !
बड़ी बेरहमी से इसे तोड़ ले जाता है !

मेरा पेड़ और देश उतना का उतना ही रह जाता !!


आईने और मायने बदल गए

@@आईने और मायने बदल गए @@














कुछ शब्द बचा रखे थे शिध्ध्त से !
किसी डायरी में लिख हिफाजत से !!
पर इस वक्त की ही थी शरारत !
आ गई मुझे पर ही थी आफत !!

अब यह क्या शब्दों के तो माएने बदल गए !
जब उठा बीमारी से मेरे घर के आईने बदल गए !!

कहते हैं कैसे सताए गए हो !
यु तुम कंहा से आ गए हो !!

मेरा तो बस एक ही चेहरा था !!
साँझ-सुबह एक ही पहरा था !

क्या मुसीबत है वक्त के साथ मायने बदल जाते हैं !
कुछ दिनों में मेरे अपने घर के आइने बदल जाते हैं


Friday, 11 January 2013

तहे दिल से आगाज करता हूँ















आज फिर से तहे दिल से आगाज  करता हूँ !
लूट जाऊ तेरे लिए पर तेरी बात करता हूँ !!
मैं शायर  नहीं न ही खुदा का रूप हूँ दोस्तों
चाहा हूँ तुझे और तुझ से ही प्यार करता हूँ !!

वक्त की जंजीर में इस कदर बांधा गया मैं
भूल गया खुद को पर तुझे याद  करता हूँ !!
तेरी आगोश में खुद को इस कदर देखा मैं ने
खुद को खुदा के पास महसूस करता   हूँ !!

कोई करता है प्रार्थना  कोई करवाता है !
मैं तो उस डाल का परिंदा हूँ जिस में
फूल आकार चले गए  और  मैं बैठा इन्तजार में !