Saturday, 12 December 2015

समय की स्याही














नहीं आसान सारी हसरतो को यूँ दबाकर रखना,
बर्बाद कर के किसी को , अपने स्वार्थ को रखना !
मिलता नहीं सुंकून किसी का यूँ दिल दुखाकर ,
मेरे खुदा, इस खूबी को सब में बरक़रार रखना !!


बदलते हुए दौर में, चाहे जितना बदल जाये तू,
दिल के किसी कोने में कंही इसान को रखना !
इबादत में आज भी बहुत ताकत है मेरे दोस्त,
घर के किसी कोने में कंही भगवान को रखना !!

रूठना है न तुझे रूठ बेशक रूठ जा मेरी जिंदगी
पर मना लूंगा तुझे बस थोड़ी सी जगह रखना !!
अपनी किस्मत को खुद लिखना, खुद सजाना, बस ,
मेहनत की कलम और समय की स्याही साथ रखना !!!

Saturday, 11 January 2014

@@हम फिर नशे में होंगे@@













कई लोग दूर होंगे कई लोग पास होंगे !!
हम आप के हैं और आप के साथ होंगे !!

रोयेंगे परिंदे भी डाल से यूँ जुदा होकर !!
मुस्कुराते हुए हम आप के साथ होंगे !!

खिलखिलाते रहना यूँ मेरा हाथ थाम कर !!
मंजिल मिलने के रास्ते मेरे आसन होंगे !!

रूठ कर मैं, खुद सब से जुदा होता जाता हूँ !
मिलना वंहा जन्हा से हमारे साथ छुटे होंगे !!

कई दफा सब कुछ पाकर भी मैं तनहा था !
कुछ और नहीं वो हम से फिर रूठे गए होंगे !!

कुछ मौसम ही ख़राब है, जुदाई का मेरे यारो !
वरना ये फूल भी कब्रों में रखे यूँ सूखे न होंगे !!

एक कविता लिखी तो गलती का अहसाह हुआ !
कंही न कंही कविताओ के रिश्ते हम से रहे होंगे !!

और फिर आ गया मैं अपने ही उसी चौराहे में !!
करना माफ़ फिर से हमें हम फिर नशे में होंगे !!

Monday, 11 November 2013

"अभी तक बाकि है"














छु गया था आप से, अहसास अभी तक बाकि है !
बरसात तो चली गयी पर बहार अभी तक बाकि हैं !!

कहने को तो ये सारा जंहाँ, पूरी तरह से मेरा ही है !
जहाँ वालो को मेरा अपना होना अभी तक बाकि है!!

पुत्र ने आज मर्यादा को जला कर रख कर दिया !
पिता कि चिता में,लगी आग अभी तक बाकि है !!

मेरा भगवान मेरे साथ है,हर राह,हर मुकाम में !
इसी रहना साथ मेरे,मंजिल,अभी तक बाकि है !!

वैसे तो मैंने पी तो ली है,मैखाने,मैखाने में जाकर !
बस उनकी नजरो से पीना , अभी तक बाकि है !!

कई गिरे बने हैं , मोहब्बत में कई दफा मेरे मौला !
मेरा इस सर जमी से मोहब्बत, अभी तक बाकि है !!

शीशा,पत्थर के रिश्तो कि तरह है तेरा मेरा रिश्ता !
ज़माने भर से रजामंदी ,लेना अभी तक बाकि है !!

Monday, 28 October 2013

दोस्ती के नाम कर दिया




















चले कदम दो कदम , और अपना, नाम कर दिया ! 
संग थे तुम्हारे सुख,दुःख में तुम्हारा साथ है दिया !!

मैं मुसाफिर हूँ, घर से चला अकेला था,अकेला हूँ !!
अपनी राह को जब से मैंने मंजिल के नाम कर दिया !!

टूटे हुए दिल, और झुकी नजर से अंदाजा न लगाना !!
मैं ने तो आज कठोर , पत्थर दिल को मोम कर दिया !!


आज कल हर शख्स मुझे घूरती निगाहो से देखता है !!
जब से मैं ने तुझे मोहब्बत, का, मतलब समझा दिया !!

मेरे हौसलो को मापने कि कोशिश मत करना यारो !!
मैं ने तो आज पैमाने को तोड़ कर खाक कर दिया !!

मेरी बुलंदी तो बस मेरे साथ चलती है ,हर दिन,रात !!
जब से मैं ने अपनी मेहनत को उसके नाम कर दिया !!

बार , बार मुझे गिराने कि कोशिशे नाकाम हो गयी हैं !!
जब मैंने अपने दुश्मनो को दोस्ती के नाम कर, दिया !!

Tuesday, 22 October 2013

मेरे दर्द का करण कोई पूछने नहीं आते



लाख लाख शुक्र है जो सपने में मेरे नहीं आते ! 
कहते हैं, हकीकत में कभी पैगाम नहीं आते !!

मैं तो अक्सर ही तुझे मेरा ख्याल में ही पाता हूँ !
भला हुआ जो तुम मुझे से मिलने नहीं आते !!

गीत गुनगुना कर भूल जाता हूँ गिले शिकवे !
सुनना मत मुझे,गीतों के राग भी नहीं आते !!

खुद से लड़ा कई दफा और हर बार हार जाता हूँ !
यार कहते हैं किसी बैध से मिल क्यूँ नहीं आते !!

कैसे कहू दोस्तों अक्सर क्यूँ खुद से लड़ रहा हूँ !
फूल उदास हैं,इनसे भवरे मिलने क्यूँ नहीं आते !!

दुसरो के दर्द में मैं भी खुद आंसू क्यूँ बहा रहा हूँ !
पर क्या मेरे दर्द का करण कोई पूछने नहीं आते !!

Sunday, 22 September 2013

फिर आज धड़का है दिल बड़ी जोर से !











फिर आज धड़का है दिल बड़ी जोर से ! 
कंही कोई मुझे याद कर रोया होगा !!

खुदा उस पर बस इतना करम करना !
नींद दे देना वो सारी रात न सोया होगा !!

बात क्या हुई होगी जो मैं उसे याद हूँ !!
उसे हवाओं ने मेरा हाल सुनाया होगा !!

आज अमावस की रात भी उजाली है !!
उसने याद कर मुझे दीप जलाया होगा !!

आज तो फूलो के रंग भी उड़ गए हैं !
वो रोकर फिर से न मुस्कुराया होगा !!

लाखो की मोतियों के दाम गिर गए हैं !
तोड़ कर हार जमीन में फैलाया होगा !!!

आज हवाओ में कुछ नमी नमी सी है !!
खुदा यार ने आज आंसू बहाया होगा !!

Friday, 23 August 2013

क्या मुसीबत है दिल



















क्या मुसीबत है दिल से गजल भी नहीं लिख सकता !

डरता हूँ कंही नाम न आ जाये मेरी गजल में ,
बदनामी से बड़ा डर लगा है , तेरी बदनामी सह नहीं सकता !!

और बदनामी मेरी हो बस ऐसा हो नहीं सकता !!
करे न दुनिया तुझ पर सितम ऐसा हो नहीं सकता !
मिलु न तुम से यैसा सोच साँस रुक जाती है !
तेरे बिना लगता है अब मैं जी नहीं सकता !!

कहते हैं लोग बड़ा दर्द है तेरी लेखनी में,भूल उसे !
मैं कहता लिखे बिना तुझे मैं रह नहीं सकता !!
बस आज ख़त्म हो इन यादो का सिलसिला
और मैं हूँ की सांसो के बिना रह नहीं सकता !!