Friday, 5 July 2013

मेरा पेड़ और देश

@@मेरा पेड़ और देश@@

 
आज ५ साल बाद,
अपने लगाये आम के पेड़ से गया मिलने ! 
ख़ुशी से इतर कर पेड़ लगा हिलने !

बोला मेरे पानी, खाद, दाता आ गए !
बर्षो के बाद मुझे से मिलने आ गए !

लगाये पेड़ को देख हुआ अचंभित !
यही मेरा पेड़ है, मैं हुआ भ्रमित !!

क्यूंकि मेरा पेड़ उतना ही था बड़ा जितना ५ साल पहले !
मुझे न गया रहा,देख उसकी हालत गया न सहा ,

पेड़ के कहा:
क्या करू जितना होता हु बड़ा,
हर दिन गुमान से भरा,

और एक दिन पूर्णमासी आती है !
अप की माँ मुझे तोड़ ले जाती है !!

उस आम के पेड़ को देख देश का ख्याल आया !
देश भी पेड़ की तरह कितना गया है सताया !!

हर पंचवर्षी में कोई न कोई आता है !
बड़ी बेरहमी से इसे तोड़ ले जाता है !

मेरा पेड़ और देश उतना का उतना ही रह जाता !!


आईने और मायने बदल गए

@@आईने और मायने बदल गए @@














कुछ शब्द बचा रखे थे शिध्ध्त से !
किसी डायरी में लिख हिफाजत से !!
पर इस वक्त की ही थी शरारत !
आ गई मुझे पर ही थी आफत !!

अब यह क्या शब्दों के तो माएने बदल गए !
जब उठा बीमारी से मेरे घर के आईने बदल गए !!

कहते हैं कैसे सताए गए हो !
यु तुम कंहा से आ गए हो !!

मेरा तो बस एक ही चेहरा था !!
साँझ-सुबह एक ही पहरा था !

क्या मुसीबत है वक्त के साथ मायने बदल जाते हैं !
कुछ दिनों में मेरे अपने घर के आइने बदल जाते हैं