हम आप के हैं और आप के साथ होंगे !!
रोयेंगे परिंदे भी डाल से यूँ जुदा होकर !!
मुस्कुराते हुए हम आप के साथ होंगे !!
खिलखिलाते रहना यूँ मेरा हाथ थाम कर !!
मंजिल मिलने के रास्ते मेरे आसन होंगे !!
रूठ कर मैं, खुद सब से जुदा होता जाता हूँ !
मिलना वंहा जन्हा से हमारे साथ छुटे होंगे !!
कई दफा सब कुछ पाकर भी मैं तनहा था !
कुछ और नहीं वो हम से फिर रूठे गए होंगे !!
कुछ मौसम ही ख़राब है, जुदाई का मेरे यारो !
वरना ये फूल भी कब्रों में रखे यूँ सूखे न होंगे !!
एक कविता लिखी तो गलती का अहसाह हुआ !
कंही न कंही कविताओ के रिश्ते हम से रहे होंगे !!
और फिर आ गया मैं अपने ही उसी चौराहे में !!
करना माफ़ फिर से हमें हम फिर नशे में होंगे !!
