Sunday, 13 May 2012

हर शाम समुन्दर के किनारे एक नाम लिखा जाता है !















हर शाम समुन्दर के किनारे एक नाम लिखा जाता है !
क्या है दुश्मनी मेरी उस से की हर बार नाम मिटा जाता है !!

कह दो समुन्दर से अपनी औकात में रहे !
पागल कुत्ते ने थोड़े ही काटा है जो मैं लिखू और वह मिटता जाये !!

बरसो से टूटे हो कहर बन कर लोगो की जिंदगी  में !
तुम क्या पता की कैसे जिंदगी जिया जाये !!

कुछ तो शिष्टाचार में रहा करो बड़ी शिद्दत से एक नाम लिखते हैं लोग !
कम से कम तुम्हारे द्वारा तो न मिटाया जाये !!


//पर इसके  बाद समुन्दर जो बात कही मेरे तो आंसु ही छलक आये ///

अरे मैं तो बस डोलने वाला दरिंदा हूँ !!
मेरे द्वारा कान्हा किसी का नाम मिटाया जाये !

मैं तो कद्र करता हूँ लोगो के मोहब्बत की !
चरण छुने आता हूँ लोगो के मोहाब्त की पर इसी नादानी में !!
उनकी कच्ची सी मोहब्बत का नाम  मिट मिट जाये !!

कैसे लोग समुद्र के किनारे अपनी इश्क का नाम लिख जाते हैं !
और एक समुन्दर की लहर नाम मोहब्बत का नाम मिटा जाती है !
अरे मोहब्बत तो उस पंछी का नाम है जिसका अन्धिया भी कुछ नहीं बिगड़ पाती हैं !!