आज फिर से तहे दिल से आगाज करता हूँ !
लूट जाऊ तेरे लिए पर तेरी बात करता हूँ !!
मैं शायर नहीं न ही खुदा का रूप हूँ दोस्तों
चाहा हूँ तुझे और तुझ से ही प्यार करता हूँ !!
वक्त की जंजीर में इस कदर बांधा गया मैं
भूल गया खुद को पर तुझे याद करता हूँ !!
तेरी आगोश में खुद को इस कदर देखा मैं ने
खुद को खुदा के पास महसूस करता हूँ !!
कोई करता है प्रार्थना कोई करवाता है !
मैं तो उस डाल का परिंदा हूँ जिस में
फूल आकार चले गए और मैं बैठा इन्तजार में !
