Sunday, 11 August 2013

अंतिम शब्द तेरी बेगुनाही के
















लिखूंगा अंतिम शब्द तेरी बेगुनाही के !

सरहद में अंतिम साँस लेते सिपाही के !!

की क़त्ल नहीं किया मेरे जज्बातों का ,
मेरे सारे मिटे अंतिम बचे ख्यालातो का !!

दर्द को गले लगाकर मौत के इन्तजार में,
उमड़ते घुमड़ते, आते जाते विचार में !!

खून से लथपथ सोच रहा था !
मेरा घर कच्चा ही रह गया था !
जिसे तालाब डूबता बचाकर बनाया था संगिनी !
किया वादा अधुरा ही रह गया था !!

जब निकला घर से देश के लिए माँ ने जो कहा :

जा बेटा कुर्वान हो जाना धरा के लिए !
इस प्यारी सी धरती भारत माँ के लिए !

लिखूंगा अंतिम शब्द तेरी बेगुनाही के !
सरहद में अंतिम साँस लेते सिपाही के !!

मेरा चार साल का बेटा आता था सामने !
धरती में पैर पटक देता था सलामी !
करे शैतानी खुद को लगता था डाटने !!
एक साल की मेरी प्यारी बेटी सुनामी !

मेरी बहन के आँखों के सपने !
शादी कर बस जाये घर अपने !

जब लेने गया मुनीम से कर्जा था !
गरीब है तू दिया भिखारी का दर्ज था !

लिखूंगा अंतिम शब्द तेरी बेगुनाही के ,
सरहद में अंतिम साँस लेते सिपाही के !!
आज योगेश अंत न लिखूंगा सिपाही के !
पर लिखूंगा अंतिम शब्द तेरी बेगुनाही के !!