
लिखूंगा अंतिम शब्द तेरी बेगुनाही के !
सरहद में अंतिम साँस लेते सिपाही के !!
की क़त्ल नहीं किया मेरे जज्बातों का ,
मेरे सारे मिटे अंतिम बचे ख्यालातो का !!
दर्द को गले लगाकर मौत के इन्तजार में,
उमड़ते घुमड़ते, आते जाते विचार में !!
खून से लथपथ सोच रहा था !
मेरा घर कच्चा ही रह गया था !
जिसे तालाब डूबता बचाकर बनाया था संगिनी !
किया वादा अधुरा ही रह गया था !!
जब निकला घर से देश के लिए माँ ने जो कहा :
जा बेटा कुर्वान हो जाना धरा के लिए !
इस प्यारी सी धरती भारत माँ के लिए !
लिखूंगा अंतिम शब्द तेरी बेगुनाही के !
सरहद में अंतिम साँस लेते सिपाही के !!
मेरा चार साल का बेटा आता था सामने !
धरती में पैर पटक देता था सलामी !
करे शैतानी खुद को लगता था डाटने !!
एक साल की मेरी प्यारी बेटी सुनामी !
मेरी बहन के आँखों के सपने !
शादी कर बस जाये घर अपने !
जब लेने गया मुनीम से कर्जा था !
गरीब है तू दिया भिखारी का दर्ज था !
लिखूंगा अंतिम शब्द तेरी बेगुनाही के ,
सरहद में अंतिम साँस लेते सिपाही के !!
आज योगेश अंत न लिखूंगा सिपाही के !
पर लिखूंगा अंतिम शब्द तेरी बेगुनाही के !!
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