Friday, 5 July 2013

आईने और मायने बदल गए

@@आईने और मायने बदल गए @@














कुछ शब्द बचा रखे थे शिध्ध्त से !
किसी डायरी में लिख हिफाजत से !!
पर इस वक्त की ही थी शरारत !
आ गई मुझे पर ही थी आफत !!

अब यह क्या शब्दों के तो माएने बदल गए !
जब उठा बीमारी से मेरे घर के आईने बदल गए !!

कहते हैं कैसे सताए गए हो !
यु तुम कंहा से आ गए हो !!

मेरा तो बस एक ही चेहरा था !!
साँझ-सुबह एक ही पहरा था !

क्या मुसीबत है वक्त के साथ मायने बदल जाते हैं !
कुछ दिनों में मेरे अपने घर के आइने बदल जाते हैं


No comments:

Post a Comment