चले कदम दो कदम , और अपना, नाम कर दिया !
संग थे तुम्हारे सुख,दुःख में तुम्हारा साथ है दिया !!
मैं मुसाफिर हूँ, घर से चला अकेला था,अकेला हूँ !!
अपनी राह को जब से मैंने मंजिल के नाम कर दिया !!
टूटे हुए दिल, और झुकी नजर से अंदाजा न लगाना !!
मैं ने तो आज कठोर , पत्थर दिल को मोम कर दिया !!
बार , बार मुझे गिराने कि कोशिशे नाकाम हो गयी हैं !!
जब मैंने अपने दुश्मनो को दोस्ती के नाम कर, दिया !!
मैं मुसाफिर हूँ, घर से चला अकेला था,अकेला हूँ !!
अपनी राह को जब से मैंने मंजिल के नाम कर दिया !!
टूटे हुए दिल, और झुकी नजर से अंदाजा न लगाना !!
मैं ने तो आज कठोर , पत्थर दिल को मोम कर दिया !!
आज कल हर शख्स मुझे घूरती निगाहो से देखता है !!
जब से मैं ने तुझे मोहब्बत, का, मतलब समझा दिया !!
मेरे हौसलो को मापने कि कोशिश मत करना यारो !!
मैं ने तो आज पैमाने को तोड़ कर खाक कर दिया !!
मेरी बुलंदी तो बस मेरे साथ चलती है ,हर दिन,रात !!
जब से मैं ने अपनी मेहनत को उसके नाम कर दिया !!
जब से मैं ने तुझे मोहब्बत, का, मतलब समझा दिया !!
मेरे हौसलो को मापने कि कोशिश मत करना यारो !!
मैं ने तो आज पैमाने को तोड़ कर खाक कर दिया !!
मेरी बुलंदी तो बस मेरे साथ चलती है ,हर दिन,रात !!
जब से मैं ने अपनी मेहनत को उसके नाम कर दिया !!
बार , बार मुझे गिराने कि कोशिशे नाकाम हो गयी हैं !!
जब मैंने अपने दुश्मनो को दोस्ती के नाम कर, दिया !!

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