Tuesday, 22 October 2013

मेरे दर्द का करण कोई पूछने नहीं आते



लाख लाख शुक्र है जो सपने में मेरे नहीं आते ! 
कहते हैं, हकीकत में कभी पैगाम नहीं आते !!

मैं तो अक्सर ही तुझे मेरा ख्याल में ही पाता हूँ !
भला हुआ जो तुम मुझे से मिलने नहीं आते !!

गीत गुनगुना कर भूल जाता हूँ गिले शिकवे !
सुनना मत मुझे,गीतों के राग भी नहीं आते !!

खुद से लड़ा कई दफा और हर बार हार जाता हूँ !
यार कहते हैं किसी बैध से मिल क्यूँ नहीं आते !!

कैसे कहू दोस्तों अक्सर क्यूँ खुद से लड़ रहा हूँ !
फूल उदास हैं,इनसे भवरे मिलने क्यूँ नहीं आते !!

दुसरो के दर्द में मैं भी खुद आंसू क्यूँ बहा रहा हूँ !
पर क्या मेरे दर्द का करण कोई पूछने नहीं आते !!

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