Sunday, 27 November 2011

!!प्यार और दर्द का रिश्ता!!

मैंने तो तुम से दर्द ही तो माँगा था
पर तुम ने तो अपना दर्द तो क्या जख्म भी नहीं दीखाया !!
की मुझे समझती हो पराया !
अपना नहीं समझा तुमने मुझे कभी
मैंने तो तुम से दर्द ही तो माँगा था !!

उसने कहा :-
क्या मैं तुम्हे नहीं चाहती जो अपना दर्द दे देती
तुम मेरे जख्मो देख कर रो न दो
अब बताओ तुम्हे मैं कैसे रुला देती!!

तुम रो न दो जख्मो को देखकर इसलिए नहीं दिखाया !
पर तुम ने तो एक पल में ही मुझे कर दिया पराया !!

मैंने कहा :-
अरे पगली जख्म तुम्हे हो दर्द मुझे होता है
अब दर्द मिटने के लिए जख्म कितना है जरुरी होता है !!

प्यार और दर्द का रिश्ता भी अजीब होता है !
चोट किसी को लगे और दर्द किसी और को होता है !!
क्या ईसे को कहते हैं प्यार !
हर पल हर लम्हा रहे उनका इन्तजार !!

प्यार करने वाले कभी न हो जुदा !
बस इतना करना मेरे खुदा !!

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