कभी न रहे असमा में !!
पर वक्त जब बिता ,पीछे कुछ न कुछ छुटा !!
एक दिन साँस थमने लगी,दम घुटने लगा !!
और मैं तो आग ली लपटों में जलने लगा !!
दर्द का खुमार छाया और ,
जब आंखे खुली तो अपने को असमा में पाया !!
देखा जन्हा नहीं था आना !
ख्वाइश न थी कभी असमा में टिमटिमाना!!
जब आंखे खुली तो अपने को असमा में कैद पाया !
पर मेरे साथ था कोई रौशनी का साया !!
पर धरती पर न सही असमा में जगमगा रहा था !
लोगो की आँखों से प्यार पा रहा था !!
ख्वाइश न थी कभी असमा से मिलने की !

No comments:
Post a Comment