Sunday, 27 May 2012

कल का सूरज देखने को बेताब हूँ
















कल का सूरज देखने को बेताब हूँ !
जिंदगी कहती है मैं तेरा ख्वाब हूँ !!

एक सुबह होगी अंत मेरी परिभाषाओ का !
लाएगी सुबह पोटली नई आशाओ का !!

काश की अंत इतना सुखद हो !
बस जाये मेरे राग में उल्लास रसद हो !!

ये रात ढल जा येसे !
मुट्ठी से रेट फिसली हो जैसे !

क्योंकि कल का सबेरा नई खुशियाँ नया तरंग लायेगा !
मिलूँगा दोस्तों से फिर एक दफा नया उमंग  लायेगा !!

मिलूँगा दोस्तों से अपनी बाहें फैलाए,
चाहूँगा दोस्तों से अंतिम हाथ मिलाये !!

अलविदा न कह सकूँगा ,
क्यूंकि यादो को दिल से कंहा विदा कर सकूँगा !!

कल का सूरज देखने को बेताब हूँ !
जिंदगी कहती है मैं तेरा ख्वाब हूँ !!

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