Friday, 20 April 2012

phoolo ne kaha

















साँझ तो हो गयी है इन्तजार करते करते !
साँस कभी रूक ही जाती है यूँ रुकते रुकते !

आज कल तो सारे फूल भी नफरत करते हैं ,
मेरे हाथो में काँटों को चुभा कर कहते हैं ,

मुझे अपनी टहनियों से अलग कर देते हो ,
अपना प्यार पाने को किसी को क्यूँ जुदा कर देते हो !

जा तुझे भी तेरा प्यार छोड़कर चला जायेगा !
किसी को किसी से जुदा होने का दुःख समझ आयेगा !

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